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Hindi karyashala : Swarup aur pravidhi | हिंदी कार्यशाला : स्वरूप और प्रविधि / Rajbir Singh

By: Material type: TextTextLanguage: English Publication details: New Delhi : Hindi book center, 2018. Description: 235pISBN:
  • 9789383894208
Subject(s): DDC classification:
  • 491.435  T18 SIN
Summary: इस पुस्तक में उन सभी विषयों को समाहित करने का प्रयास किया गया है-प्रत्येक कार्मिकों को हिंदी में काम करने के लिए जिसकी जानकारी जरूरी है। पुस्तक के पहले अध्याय में हिंदी कार्यशालाओं में प्रशिक्षण प्रविधि प्रस्तुत की गई है। सरकारी कार्यालयों में समस्त कार्य हिंदी में करना सांविधिक अपेक्षा है इसलिए यह बहुत जरूरी है कि कर्मिकों को हिंदी में काम करने का प्रशिक्षण प्रभावी तरीके में दिया जाए। इस अध्याय में कार्यशाला प्रशिक्षण प्रविधि को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। भारत सरकार की राजभाषा नीति पर दो पाठ शामिल किए हैं क्योंकि प्रत्येक कार्मिक को भारत सरकार की राजभाषा नीति और उसके विभिन्न प्रावधानों के साथ-साथ उसके राजभाषा बनने की पृष्ठभूमि की भी जानकारी दी जानी अपेक्षित है। प्रायः यह देखा गया है कि जिन कार्मिकों की मातृभाषा हिंदी है और जिन्होंने दसवीं कक्षा या उससे उच्च स्तर तक हिंदी पढ़ी है, उन्हें भी देवनागरी लिपि और मानक हिंदी वर्तनी का समुचित ज्ञान नहीं है। इसलिए यह आवश्यक है कि हिंदी कार्यशाला में कार्मिकों को मानक देवनागरी लिपि और हिंदी वर्तनी की भी जानकारी दी जाए। हिंदी को संविधान में राजभाषा के रूप में स्वीकार करने के 65 वर्ष बीत जाने के बाद भी हिंद. अनुवाद की भाषा बनी हुई है। साथ ही राजभाषा अधिनियम 1963 की धारा 3(3) के अनुसार कुछ निर्दिष्ट दस्तावेजों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में जारी करना जरूरी है इसलिए यह आवश्यक है कि कार्मिकों को अनुवाद के मूल सिद्धान्तों और प्रक्रिया का ज्ञान हो। _ Taken form the publisher's website.
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Books Books Nalanda Library Hindi Books 491.435 T18 SIN (Browse shelf(Opens below)) Available H418
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Hindi Workshop (Format and Technique)” by Rajbir Singh

इस पुस्तक में उन सभी विषयों को समाहित करने का प्रयास किया गया है-प्रत्येक कार्मिकों को हिंदी में काम करने के लिए जिसकी जानकारी जरूरी है। पुस्तक के पहले अध्याय में हिंदी कार्यशालाओं में प्रशिक्षण प्रविधि प्रस्तुत की गई है। सरकारी कार्यालयों में समस्त कार्य हिंदी में करना सांविधिक अपेक्षा है इसलिए यह बहुत जरूरी है कि कर्मिकों को हिंदी में काम करने का प्रशिक्षण प्रभावी तरीके में दिया जाए। इस अध्याय में कार्यशाला प्रशिक्षण प्रविधि को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। भारत सरकार की राजभाषा नीति पर दो पाठ शामिल किए हैं क्योंकि प्रत्येक कार्मिक को भारत सरकार की राजभाषा नीति और उसके विभिन्न प्रावधानों के साथ-साथ उसके राजभाषा बनने की पृष्ठभूमि की भी जानकारी दी जानी अपेक्षित है।

प्रायः यह देखा गया है कि जिन कार्मिकों की मातृभाषा हिंदी है और जिन्होंने दसवीं कक्षा या उससे उच्च स्तर तक हिंदी पढ़ी है, उन्हें भी देवनागरी लिपि और मानक हिंदी वर्तनी का समुचित ज्ञान नहीं है। इसलिए यह आवश्यक है कि हिंदी कार्यशाला में कार्मिकों को मानक देवनागरी लिपि और हिंदी वर्तनी की भी जानकारी दी जाए। हिंदी को संविधान में राजभाषा के रूप में स्वीकार करने के 65 वर्ष बीत जाने के बाद भी हिंद. अनुवाद की भाषा बनी हुई है। साथ ही राजभाषा अधिनियम 1963 की धारा 3(3) के अनुसार कुछ निर्दिष्ट दस्तावेजों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में जारी करना जरूरी है इसलिए यह आवश्यक है कि कार्मिकों को अनुवाद के मूल सिद्धान्तों और प्रक्रिया का ज्ञान हो। _ Taken form the publisher's website.

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