Bhartiya aryabhasha aur hindi | भारतीय आर्यभाषा और हिंदी / by Sunitikumar Chaturjya ; translated by Aatmaram Jajodiya
Material type:
TextLanguage: English Publication details: New Delhi: Rajkamal, 2020.Description: 322pISBN: - 9788126709335
- 491.4309 T20 CHA
| Item type | Current library | Call number | Status | Barcode | |
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Hindi Books
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Nalanda Library Hindi Books | 491.4309 T20 CHA (Browse shelf(Opens below)) | Available | H398 |
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| 491.43014 T23 SHR Hinid karyalay nideshika | हिन्दी कार्यालय निदेशिका / | 491.4303 T20 TOC Sehaj prayayvachi aur vilom shabadkosh | सहज प्रयैवाची और विलोम शब्दकोश | 491.4308 T26 SAN Rashtrabhasha Hindi | राष्ट्रभाषा हिंदी / by | 491.4309 T20 CHA Bhartiya aryabhasha aur hindi | भारतीय आर्यभाषा और हिंदी / by | 491.431 T25 PRI Hamari Hindi : Kal aur aaj हमारी हिंदी : कल और आज / | 491.4314 T24 PAN Karyalayeeya hindi | कार्यालयीय हिन्दी | 491.435 T18 SIN Hindi karyashala : Swarup aur pravidhi हिंदी कार्यशाला : स्वरूप और प्रविधि / |
भारत सरकार द्वारा यह पुस्तक पुरस्कृत हो चुकी है।
‘भारतीय आर्यभाषा और हिन्दी’ में प्रख्यात भाषाविद् डॉ. सुनीतिकुमार चाटुर्ज्या के वे अत्यन्त महत्त्वपूर्ण भाषण संकलित हैं, जो उन्होंने 1940 ई. में ‘गुजरात वर्नाक्यूलर सोसाइटी’ के आमंत्रण पर दिए थे। इन भाषणों के विषय थे : (1) ‘भारतवर्ष में आर्यभाषा का विकास’ और (2) ‘नूतन आर्य अन्त:प्रादेशिक भाषा हिन्दी का विकास’ अर्थात् राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी का विकास। जनवरी 1942 में सुनीति बाबू ने इन भाषणों को संशोधित और परिवर्धित करके पुस्तक रूप में प्रकाशित कराया था। 1960 में दूसरे संस्करण के लिए उन्होंने फिर इसे पूरी तरह संशोधित किया। इसमें कुछ अंश नए जोड़े और कुछ बातों पर पहले के दृष्टिकोण में संपरिवर्तन किया। इस प्रकार पुस्तक ने जो रूप लिया, वह आज पाठकों के सामने है, और भारत में ही नहीं विदेश में भी यह अपने विषय की एक अत्यन्त प्रामाणिक पुस्तक मानी जाती है।
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