Loksahitya mein rashtriya chetna | लोकसाहित्य में राष्ट्रीय चेतना / Shanti Jain
Material type:
TextLanguage: English Publication details: Delhi : Gyan Ganga, 2017. Description: 320pISBN: - 9789386054418
- 491.4301 T17 JAI
| Item type | Current library | Call number | Status | Barcode | |
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Books
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Nalanda Library Hindi Books | 491.4301 T17 JAI (Browse shelf(Opens below)) | Available | H409 |
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| 423.9143 T11 RAK.S English-Hindi, Hindi-English dictionary | अंग्रेजी-हिंदी, हिंदी-अंग्रेजी शब्दकोश | 491.4303T03 TOC Sehaj lokokit hindi kosh | सहज लोककित हिंदी कोश | 491.43 T25 PAN Rashtrabhasha par vichar | राष्ट्रभाषा पर विचार / by | 491.4301 T17 JAI Loksahitya mein rashtriya chetna | लोकसाहित्य में राष्ट्रीय चेतना / | 491.43014 T23 SHR Hinid karyalay nideshika | हिन्दी कार्यालय निदेशिका / | 491.4303 T20 TOC Sehaj prayayvachi aur vilom shabadkosh | सहज प्रयैवाची और विलोम शब्दकोश | 491.4308 T26 SAN Rashtrabhasha Hindi | राष्ट्रभाषा हिंदी / by |
‘लोकसाहित्य में राष्ट्रीय चेतना’ एक व्यापक और प्रभावशाली विषय है, साथ ही यह आज की पीढ़ी के लिए अतीत का एक आईना भी है, जिसपर पड़ी हुई गर्द को हटाना अपेक्षित है और अनिवार्य भी।
इस पुस्तक में लोकगीतों में राष्ट्रीय चेतना विविध रूपों में चित्रित है। कहीं तिरंगे झंडे की लहर है, कहीं चरखे का स्वर है, कहीं मातृभूमि की महिमा का गुणगान है, तो कहीं देश पर मर-मिटने का अरमान है। कहीं सीमा पर जाकर लड़ने का आह्वान है, कहीं देश का प्रहरी बनने का निमंत्रण है। इस क्रम में नारियों का त्याग और बलिदान भी बेमिसाल है।
डॉ. शांति जैन ने इस पुस्तक में लोकसाहित्य से जुड़ी प्रायः सभी विधाओं को समेकित किया है। इन्होंने राष्ट्रीय गौरव और आत्मसम्मान जगानेवाले साहित्यकारों, कवियों, गीतकारों के विचारों और रचनाओं को भी उद्धृत किया है, जिन्होंने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने और भारतमाता को स्वतंत्र करने के लिए आम लोगों को जगाया। यह पुस्तक आज और कल की पीढ़ी को स्वाधीनता आंदोलन से अवगत कराने में सार्थक भूमिका निभाएगी।
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