TY - BOOK AU - Pandey, Prithvinath TI - Aadhunik hindi vyakaran | : आधुनिक हिन्दी व्याकरण / SN - 9789380459059 U1 - 491.435 PY - 2026///. CY - New Delhi : PB - Bhartiye Pushtak Prishad, KW - Hindi language—Grammar KW - Hindi language—Usage KW - Hindi language—Morphology KW - Hindi language—Study and teaching KW - Vyakaran KW - Hindi- Grammar KW - Hindi N2 - अध्ययन–अध्यापन की दृष्टि से व्याकरण की उपयोगिता और महत्ता स्वयंसिद्ध है। भाषा का लालित्य और उसकी सुमधुरता उसकी व्याकरण सम्मत प्रस्तुति में ही निहित है। वाचिक और लिखित, दोनों ही परम्पराओं के अन्तर्गत व्याकरण की भूमिका अति महत्त्व की होती है। प्रांजल और परिमार्जित भाषा वाणी का सर्वोतम अलंकरण है । वाणी की गरिमा परिष्कृत भाषा के प्रयोग से ही होती है । अन्य आभूषण तो टूट–फूट जाते हैं किन्तु भाषा का आभूषण कभी नष्ट नहीं होता। व्याकरण वह विद्या है, जिसके द्वारा भाषा के वाक्यों, शब्दों तथा अक्षरों की उत्पत्ति, भेद, रचना आदि के नियमों का ज्ञान होता है तथा भाषा को शुद्ध पढ़ना, लिखना और बोलना आता है । जिस प्रकार साबुन हमारे वस्त्र और शरीर की मलिनता दूर कर उसको स्वच्छ और विशुद्ध बनाता है, इसी प्रकार व्याकरण हमारी भाषा की अशुद्धि को दूर कर उसे विशुद्ध और स्वच्छ बनाता है । लब्धप्रतिष्ठ भाषाविद् और मीडिया–विशेषज्ञ डॉ– पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने इस कृति के माध्यम से भाषा की स्वस्थ परम्परा को पुनर्स्थापित करने की दृष्टि से एक अनुकरणीय–अनुसरणीय पहल की है । पुस्तकालयों व छात्रों के लिए ‘आधुनिक हिन्दी व्याकरण’ स्थायी महत्त्व की पुस्तक है । ER -