000 03818nam a22002417a 4500
005 20260318230606.0
008 260313b |||||||| |||| 00| 0 eng d
020 _a9789392380631
041 _aHin
082 _aH397 T25
_bPAN
100 _aPandey, Chandrabali
_923691
245 1 _aRashtrabhasha par vichar
_b| राष्ट्रभाषा पर विचार / by
_cChandrabali Pandey
260 _aDelhi ;
_bAnanya Publication,
_c2025.
300 _a208p.
520 _aभाषा’ का प्रश्न राष्ट्रभाषा का प्रश्न बन गया । उर्दू सन् 1744–45 ई. में उर्दू में अर्थात् दिल्ली के लाल किला में बनी और मुगल शहंशाहों एवं दरबारी लोगों के साथ लखनऊ, अजीमाबाद (पटना) और मुर्शिदाबाद आदि शहरों में पहुँची । फारसी के साथ–साथ कंपनी सरकार के दरबार में दाखिल हुई और सन् 1800 में फोर्ट विलियम कॉलेज में जा जमी । फोर्ट विलियम कॉलेज की कृपा से वह ‘हिंदुस्तानी’ बनी और ‘हिंदी’ को ‘हिंदुई’ बता कर देश मंे फैलने का डौल डाला । फिर क्या हुआ इसका लेखा कब किसने लिया और आज कोई क्यों लेने लगा । आज तो 24 घंटे में इस देश के सपूत उर्दू सीख रहे हैं पर उर्दू का इतिहास मुँह खोलकर कहता है कि ‘हिंदी’ को उर्दू आती ही नहीं । और उर्दू के लोग उनकी कुछ न पूछिए । उर्दू के विषय में तो उन्होंने ऐसा जाल फैला रखा है कि बेचारी उर्दू को भी उसका पता नहीं । आज उर्दू क्या नहीं है! घर की बोली से लेकर राष्ट्र की बोली तक जहाँ देखिए वहाँ उर्दू का नाम लिया जाता है और कहा यह जाता है कि वास्तव में यही सब की बोली है । इस ‘सब की’ का अर्थ ? उर्दू का कुछ भेद खुला तो ‘हिंदुस्तानी’ सामने आई और खुलकर कहने लगी-यह भी सही, वह भी सही, यह भी नहीं, वह भी नहीं, हिंदी भी, उर्दू भी, फारसी भी, अरबी भी, संस्कृत भी, ठेठ भी, पर नहींय सबकी बोल–चाल की भाषा । ‘बोलचाल की भाषा’ का अर्थ ? बोलचाल की भाषा अभी नहीं बनने को है । —चन्द्रबली पाण्डेय
650 _aRastrabhasha
_923692
650 _aNational language
_923693
650 _aHindi language
_923694
650 _aHindi language — Social aspects — India
_923695
650 _aHindi language — Political aspects — India
_923696
650 _aLanguage policy — India
_923697
942 _cBK
999 _c31558
_d31558