| 000 | 03058nam a22002897a 4500 | ||
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| 041 | _aeng | ||
| 082 |
_a491.4309 T20 _bCHA |
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| 100 | 1 |
_aChaturjya, Sunitikumar _923717 |
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| 245 | 1 |
_aBhartiya aryabhasha aur hindi | _bभारतीय आर्यभाषा और हिंदी / by _cSunitikumar Chaturjya ; translated by Aatmaram Jajodiya |
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| 260 |
_aNew Delhi: _bRajkamal, _c2020. |
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| 300 | _a322p. | ||
| 500 | _aभारत सरकार द्वारा यह पुस्तक पुरस्कृत हो चुकी है। | ||
| 520 | _a‘भारतीय आर्यभाषा और हिन्दी’ में प्रख्यात भाषाविद् डॉ. सुनीतिकुमार चाटुर्ज्या के वे अत्यन्त महत्त्वपूर्ण भाषण संकलित हैं, जो उन्होंने 1940 ई. में ‘गुजरात वर्नाक्यूलर सोसाइटी’ के आमंत्रण पर दिए थे। इन भाषणों के विषय थे : (1) ‘भारतवर्ष में आर्यभाषा का विकास’ और (2) ‘नूतन आर्य अन्त:प्रादेशिक भाषा हिन्दी का विकास’ अर्थात् राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी का विकास। जनवरी 1942 में सुनीति बाबू ने इन भाषणों को संशोधित और परिवर्धित करके पुस्तक रूप में प्रकाशित कराया था। 1960 में दूसरे संस्करण के लिए उन्होंने फिर इसे पूरी तरह संशोधित किया। इसमें कुछ अंश नए जोड़े और कुछ बातों पर पहले के दृष्टिकोण में संपरिवर्तन किया। इस प्रकार पुस्तक ने जो रूप लिया, वह आज पाठकों के सामने है, और भारत में ही नहीं विदेश में भी यह अपने विषय की एक अत्यन्त प्रामाणिक पुस्तक मानी जाती है। | ||
| 650 | 4 |
_aHindi language—Origin _923721 |
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| 650 | 4 |
_aIndo-Aryan languages—Origin _923722 |
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| 650 | 4 |
_aLanguage- India _923723 |
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| 650 | 4 |
_aComparative linguistics—Indo-Aryan _923724 |
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| 650 | 4 |
_aHistorical linguistics—India _923725 |
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| 650 | 4 |
_aHindi _923726 |
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| 700 |
_aAatmaram Jajodiya _923718 |
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| 700 |
_aUdaynarayan Tiwari _923719 |
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| 700 |
_aMahadev Saha _923720 |
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| 942 | _cBK | ||
| 999 |
_c31562 _d31562 |
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