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041 _aeng
082 _a370.193
_bT26 KUM
100 _aKumar, Krishna
_923906
245 _aRaj samaj aur shiksha |
_bराज समाज और शिक्षा /
_cKrishna Kumar
260 _aNew Delhi :
_bRajkamal Prakashan,
_c2026.
300 _a158p.
520 _aइस पुस्‍तक ने शिक्षा की बहसों को एक नई शब्‍दावली ही नहीं, एक नई अर्थवत्‍ता भी दी है। कोई आश्‍चर्य नहीं कि यह पुस्‍तक उमस के बीच ताजी हवा के झोंके का पर्याय बन सकने की क्षमता रखती है। शिक्षा की सच्‍चाई को यह कृति राज्‍य व्‍यवस्‍था और सामाजिक जीवन की जटिल बुनावट के बीच ढूँढ़ती है। इसे पढ़ते हुए हम बच्‍चों के प्रति अपनी स्‍वाभाविक चिंता को एक राजनैतिक आधार और वैज्ञानिक अभिव्‍यक्ति पाते हुए देखते हैं।
650 4 _aEducation—Social aspects—India
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650 4 _aEducation and state—India
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650 4 _aEducation—Political aspects—India
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650 4 _aEducational sociology—India
_923910
650 4 _aEducation—Philosophy
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